सोने की कीमतों ने मार्च 2026 में ऐसी गिरावट दर्ज की है जो पिछले 40 सालों में सबसे बड़ी मानी जा रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड की कीमत इस हफ्ते लगभग 11% तक गिर गई, जो 1983 के बाद से न्यूनतम स्तर को छू रही है। शुक्रवार को सोना करीब 3.1% लुढ़ककर लगभग 4,508 डॉलर प्रति औंस तक आ गया, जबकि Comex गोल्ड फ्यूचर्स भी 9.5% से ज्यादा गिरकर 4,570 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुआ। इस गिरावट के बाद गोल्ड की वैल्यू मार्च 2026 की शुरुआत की तुलना में 14% से ज्यादा धीमी हो गई है।
क्यों तेजी से लुढ़का सोना
इस जबरदस्त गिरावट की मुख्य वजह मजबूत अमेरिकी डॉलर और बढ़ती ब्याज दरों को माना जा रहा है। यूएस फेड ने आगे ब्याज घटाने के संकेत देने से इंकार किया है, जिससे रिस्क फ्री रिटर्न वाले बांड्स की मांग बढ़ी और सोने की ओर से पैसा खिंचा गया। इराक‑इजरायल‑ईरान तनाव के बीच तेल की कीमतें 90–100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास चल रही हैं, जिससे महंगाई का डर बढ़ा है और इससे भी इंटरेस्ट रेट्स में उछाल आने की संभावना है। इसके अलावा निवेशकों ने पिछले कुछ महीनों में अच्छा मुनाफा कमा लिया था, इसलिए भारी स्तर पर प्रॉफिट बुकिंग की वजह से गोल्ड एटीएफ‑जैसे संस्थागत फंडों से भी पैसा निकला है।
भारत में सोने की कीमतें
भारतीय बाजार में भी इसी ग्लोबल ट्रेंड का असर दिखा है। 19 मार्च 2026 तक दिल्ली समेत बड़े शहरों में 24 कैरेट सोने की कीमत लगभग 1.42 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास रही, जो 2 मार्च के लगभग 1.69 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के उच्च स्तर से 15% से ज्यादा नीचे है। इस दौरान 22 कैरेट सोना भी 1.30–1.33 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के बीच आ गया, जिसका अर्थ है कि होलसेल और बुलियन लेवल पर हर 10 ग्राम सोना रिकॉर्ड गिरावट के साथ आ रहा है। भारत में ज्वैलर्स ने इस गिरावट के बावजूद कैपिटल गेन और आयात शुल्क की वजह से रिटेल लेवल पर रियल‑टाइम घटते फ्यूचर्स को फुल एडजस्ट नहीं किया, इसलिए ग्राहकों को थोड़ी ज्यादा रियायत मिलती दिख रही है।
आगे क्या हो सकता है?
एक्सपर्ट्स के मुताबिक अगर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोना 4,400 डॉलर प्रति औंस के नीचे जाता है, तो यह लेवल फिर 3,800–4,000 डॉलर प्रति औंस तक धीरे‑धीरे टूट सकता है, इसके पीछे जारी हाई रिटर्न बॉन्ड‑मार्केट और डॉलर की ताकत वजह बनी हुई है। वहीं लंबी अवधि में जियो‑पॉलिटिकल टेंशन, बढ़ती एनर्जी खपत और बैंक‑सेंट्रल बैंकों की जारी खरीदारी की वजह से सोना अभी भी “सेफ हेवन” के रूप में माना जा रहा है। भारतीय रुपये की कमजोरी की वजह से लॉकल लेवल पर गिरावट वैश्विक लेवल की तुलना में थोड़ी कम दिख रही है, फिर भी अगले कुछ हफ्तों में 24 कैरेट सोना 1.35–1.40 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के बीच ट्रेड कर सकता है, अगर ग्लोबल फ्यूचर्स इसी गति से गिरते रहें।



