इज़राइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव से भारतीय Share Market पर दबाव बढ़ सकता है। एनालिस्ट्स का मानना है कि इससे शुरुआती बिकवाली हो सकती है, खासकर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के कारण।
जियोपॉलिटिकल टेंशन का असर
वेल्थमिल सिक्योरिटीज की इक्विटी स्ट्रैटेजिस्ट क्रांति बथिनी ने कहा कि ऐसे टेंशन से बाजार में नेगेटिव सेंटिमेंट और सेलिंग प्रेशर पैदा होता है। बाजार यह देखेगा कि यह शॉर्ट-टर्म एक्शन रहेगा या लंबी लड़ाई में बदल जाएगा। इससे प्रभाव की गहराई तय होगी।
कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव
अमेरिका-ईरान टेंशन से क्रूड ऑयल की कीमतें 67 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच चुकी हैं, जो 2-3% ऊपर हैं। होर्मुज स्ट्रेट में रुकावट की चिंता से कीमतें और बढ़ सकती हैं। एनरिच मनी के सीईओ पोनमुदी आर ने चेतावनी दी कि भारत जैसे बड़े तेल आयातक के लिए यह महंगाई और मैक्रो दबाव बढ़ाएगा।
बाजार आउटलुक
आने वाले हफ्ते में भारी उतार-चढ़ाव संभव है, खासकर 2 मार्च को ओपनिंग गैप-डाउन हो सकती है। एनर्जी, डिफेंस स्टॉक्स को सपोर्ट मिलेगा, जबकि एविएशन, लॉजिस्टिक्स, ऑटो, पेंट्स और कंज्यूमर डिस्क्रिशनरी पर मार्जिन दबाव पड़ेगा। गोल्ड व सेफ हैवन एसेट्स में खरीदारी बढ़ेगी।
विशेषज्ञों की राय
अगर क्रूड 80 डॉलर से ऊपर गया तो भारतीय बाजार पर बड़ा नकारात्मक असर पड़ेगा, क्योंकि इससे महंगाई सभी सेक्टरों को प्रभावित करेगी। हालांकि, स्टैलियन एसेट के अमित जेसवानी और इक्विट्री के पवन भराडिया का मानना है कि बाजार इसे नजरअंदाज कर सकता है, और यह सिर्फ शॉर्ट-टर्म रिएक्शन होगा। निवेशक सतर्क रहें।
Disclaimer: यहां पर दी गई जानकारी कोई भी निवेश सलाह नहीं है। शेयर बाजार में निवेश करने से पहले मार्केट एक्सपर्ट की राय जरुर लें और अपनी जिम्मेदारी पर ही निवेश करें।




