हाल के महीनों में ईरान–केन्द्रित तनाव और सैन्य टकराव ने दुनिया भर की रक्षा और ऊर्जा पॉलिसी को एक अलग दिशा दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के टकरावों में महंगे मिसाइल और विमानों की बजाय सस्ते लेकिन संख्या में ज़्यादा ड्रोन ही निर्णायक भूमिका निभा रहे हैं, जिसने ड्रोन वॉरफेयर को भविष्य की जंग का मुख्य स्ट्रक्चर बना दिया है। इसी दौरान ईरान–अमेरिका और ईरान–इज़राइल जैसे टकरावों में ड्रोन एक्सपोज़र ने ग्लोबल डिफेंस इंडस्ट्री के लिए नए ऑर्डर और टेक्नोलॉजी डिमांड भी खोल दी है।
ड्रोन वॉरफेयर की तेज़ वृद्धि
ईरान–इज़राइल युद्ध के दौरान इस्तेमाल हुए हज़ारों छोटे और सस्ते ड्रोन ने यह साबित कर दिया कि भविष्य की जंग में महंगे हथियारों की जगह लो‑कॉस्ट, मल्टीपल ड्रोन फ्लीट ज़्यादा प्रभावी साबित हो सकते हैं। इससे न केवल ड्रोन मैन्युफैक्चरर्स बल्कि काउंटर‑UAS (Counter‑Unmanned Aircraft System) इंडस्ट्री यानी ड्रोन रोकने वाले सिस्टम भी तेज़ी से आगे बढ़ रहे हैं। यूरोप और अमेरिका के कई देश अब नए ड्रोन‑डोमिनेंस प्रोग्राम बनाने, ड्रोन इन्वेंट्री जमा करने और लोईटरिंग म्यूनिशंस यानी ‘किलर ड्रोन’ जैसी तकनीकों पर भारी बजट आवंटित कर रहे हैं।
EV मांग और ऊर्जा नीतियों पर असर
इस युद्ध ने खाड़ी और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ जैसे क्रिटिकल ऑयल रूट्स की नाज़ुक तस्वीर फिर से उजागर की है, जहां दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत तेल और एलएनजी आपूर्ति गुज़रती है। तनाव के बीच तेल और गैस की कीमतों में उछाल ने अमेरिकी और यूरोपीय उपभोक्ताओं में इलेक्ट्रिक वाहनों की तलाश तेज़ कर दी है, जिससे EV डिमांड में वृद्धि दर्ज की गई है। कार ब्रोकरेज और EV लीज़िंग प्लेटफॉर्म्स ने फरवरी के अंत से लेकर अप्रैल 2026 तक नए और पुराने EV के लिए इन्क्वायरी में 25–35 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दिखाई है।
इससे जुड़ी शेयर और निवेश थीम
इस नए रुझान ने दुनिया भर के ड्रोन, रक्षा और EV‑रिलेटेड इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में शेयर आधारित निवेश फोकस बदल दिया है। भारत में भी ड्रोन रूल्स 2021 और पीएलआई योजना के तहत ड्रोन इंडस्ट्री को बढ़ावा मिला है और कंपनियां जैसे Ideaforge, Zen Technologies, Bharat Electronics Limited (BEL), Hindustan Aeronautics Limited (HAL) और Drone Destination जैसे शेयर अब ड्रोन‑थीम्ड ग्रोथ चैनल में देखी जा रही हैं। साथ ही इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता, बैटरी टेक और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर वाले शेयर भी लंबी अवधि के निवेशकों की नज़र में आ गए हैं, क्योंकि युद्ध‑प्रेरित ऊर्जा अस्थिरता ने EV ट्रांजिशन को और ज़रूरी बना दिया है।
Disclaimer: यहां पर दी गई जानकारी कोई भी निवेश सलाह नहीं है। शेयर बाजार में निवेश करने से पहले मार्केट एक्सपर्ट की राय जरुर लें और अपनी जिम्मेदारी पर ही निवेश करें।



