इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक बाजारों में हलचल मचा दी है। 2 मार्च 2026 को क्रूड ऑयल की कीमतें 4.6 प्रतिशत चढ़कर 76.25 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गईं। जेफरीज के अनुसार भारत के लिए ऊर्जा कीमतों में उछाल मैक्रोइकॉनॉमिक दबाव बढ़ा सकता है क्योंकि देश 55 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है।
जेफरीज की भारत रणनीति
जेफरीज ने कहा कि मिडिल ईस्ट संघर्ष का असर शॉर्ट टर्म रहेगा। भारत के निर्यात का 17 प्रतिशत हिस्सा इस क्षेत्र जाता है और 38 प्रतिशत रेमिटेंस यहां से आते हैं। हर 10 डॉलर प्रति बैरल क्रूड बढ़ने से करेंट अकाउंट डेफिसिट जीडीपी का 0.5 प्रतिशत बढ़ सकता है। ब्रोकरेज ने हाल के संघर्षों को अस्थायी बताते हुए डिप को खरीदारी का मौका कहा।
प्रभावित क्षेत्र और स्टॉक्स
तेल विपणन कंपनियां जैसे IndiGo, OMCs पर दबाव पड़ सकता है। L&T का 37 प्रतिशत ऑर्डर बुक मिडिल ईस्ट से जुड़ी है जो 7.33 लाख करोड़ रुपये की है। KEC, Cummins India, Thermax, AIA Engineering जैसे एक्सपोर्टर प्रभावित हो सकते हैं। क्रूड 80 डॉलर से ऊपर जाने पर मुद्रास्फीति बढ़ेगी।
लाभ वाले क्षेत्र
डिफेंस सेक्टर में रुचि बढ़ी है क्योंकि भारत का डिफेंस खर्च FY26 में 18 प्रतिशत सालाना बढ़ा। BEL, HAL, Data Patterns जैसे स्टॉक्स फायदा उठा सकते हैं। ONGC और Oil India जैसे तेल एक्सप्लोरर 0.5 प्रतिशत ऊपर रहे क्योंकि ऊंची क्रूड कीमतें रेवेन्यू बढ़ाती हैं। IT और एनर्जी स्टॉक्स रिलेटिव बेनिफिशियरी हो सकते हैं।
बाजार का हालिया रिएक्शन
2 मार्च 2026 को निफ्टी में गिरावट आई क्योंकि रिस्क एपेटाइट कम हुई। Emkay ने चेतावनी दी कि तनाव लंबा चला तो निफ्टी 24,500-25,000 तक टेस्ट कर सकता है। रुपया कमजोर हुआ और FII बिकवाली संभव है। मिडिल ईस्ट से जुड़े स्टॉक्स जैसे Adani Ports, Sun Pharma, Dr Reddys, Lupin पर नजर है।
Disclaimer: यहां पर दी गई जानकारी कोई भी निवेश सलाह नहीं है। शेयर बाजार में निवेश करने से पहले मार्केट एक्सपर्ट की राय जरुर लें और अपनी जिम्मेदारी पर ही निवेश करें।




