Iran-US-Israel War: 100 डॉलर के पार जा सकता है कच्चा तेल, S and P ग्लोबल ने दी बड़ी चेतावनी, बन सकता है इतिहास का सबसे बड़ा संकट!

Iran-US-Israel War: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में चिंता बढ़ा दी है। S&P Global Energy की 2 मार्च को जारी रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि अगर ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ से तेल की सप्लाई बाधित होती है या पूरी तरह रुक जाती है, तो यह इतिहास का सबसे बड़ा ऑयल सप्लाई संकट बन सकता है।

रिपोर्ट के अनुसार, 1 मार्च को इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से केवल पांच ऑयल टैंकर गुजरे, जबकि सामान्य दिनों में औसतन करीब 60 टैंकर प्रतिदिन गुजरते हैं। यदि टैंकरों की यह कमी एक सप्ताह तक जारी रहती है, तो इसे ऐतिहासिक घटना माना जाएगा। लंबी अवधि तक यह स्थिति बनी रहने पर वैश्विक तेल बाजार को गंभीर झटका लग सकता है।

ग्लोबल सप्लाई पर बड़ा दांव

साल के पहले दो महीनों में प्रतिदिन लगभग 2.08 करोड़ बैरल कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पाद इसी मार्ग से भेजे गए। इनमें से 82 प्रतिशत एशियाई बाजारों में गए। इसके अलावा, वैश्विक LNG सप्लाई का लगभग 18 प्रतिशत हिस्सा भी इसी समुद्री रास्ते से गुजरता है।

यदि यह मार्ग प्रभावित होता है, तो प्रतिदिन लगभग 1.5 करोड़ बैरल कच्चे तेल और उत्पादों की सप्लाई खतरे में पड़ सकती है। हालांकि, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात की पाइपलाइनें कुछ हद तक इस कमी को पूरा कर सकती हैं, लेकिन उनकी क्षमता सीमित है। अगर रोजाना 70 लाख बैरल या उससे अधिक सप्लाई बाधित रहती है, तो यह रूस-यूक्रेन युद्ध या 1990 के खाड़ी युद्ध के शुरुआती चरण से भी बड़ा झटका साबित हो सकता है।

100 डॉलर के पार जा सकता है कच्चा तेल

रिपोर्ट के मुताबिक, शॉर्ट टर्म में तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव संभव है। बाजार की अफवाहें, घबराहट और इमरजेंसी खरीदारी कीमतों को तेजी से ऊपर ले जा सकती हैं।

यदि सप्लाई आंशिक रूप से बहाल हो जाती है, तो कीमतें 80 डॉलर के मध्य स्तर पर रह सकती हैं। लेकिन अगर कई महीनों तक 70 लाख बैरल प्रतिदिन या उससे अधिक की सप्लाई बाधित रहती है, तो कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल या उससे ऊपर जा सकता है। ऐसी स्थिति में ऊंची कीमतें मांग को कम करने का काम करेंगी।

फाइनेंशियल मार्केट्स पर असर

ऊंची तेल कीमतों का असर केवल ऊर्जा क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा। इससे महंगाई बढ़ सकती है और केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक नीतियों पर दबाव पड़ सकता है। जिन देशों के पास तेल और गैस का भंडार कम है, वे सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे।

वैश्विक शेयर बाजारों में अस्थिरता बढ़ सकती है और निवेशकों के लिए जोखिम भी बढ़ जाएगा। कुल मिलाकर, यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव लंबा खिंचता है, तो यह केवल एनर्जी मार्केट ही नहीं बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर संकट का कारण बन सकता है।

Disclaimer: यहां पर दी गई जानकारी कोई भी निवेश सलाह नहीं है। शेयर बाजार में निवेश करने से पहले मार्केट एक्सपर्ट की राय जरुर लें और अपनी जिम्मेदारी पर ही निवेश करें।

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