अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान में हुई 21 घंटे की वार्ता बिना किसी समझौते के समाप्त हो गई है, जिससे सोमवार 13 अप्रैल 2026 को भारतीय Stock Market में उतार-चढ़ाव की आशंका बढ़ गई है । ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बक़ाई ने कहा कि अमेरिकी पक्ष की अत्यधिक मांगों के कारण बातचीत विफल रही, हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कूटनीति कभी समाप्त नहीं होती । XM ऑस्ट्रेलिया के CEO पीटर मैकग्वायर का अनुमान है कि बाजार खुलते ही कच्चे तेल की कीमतें तुरंत 3-5 डॉलर तक उछल सकती हैं और पहले ही सत्र में Brent crude $105-108 प्रति बैरल की ओर बढ़ सकता है ।
शेयर बाजार पर संभावित प्रभाव
विश्लेषकों का मानना है कि Sensex और Nifty में सोमवार को 0.8 से 1.2 प्रतिशत तक की गिरावट देखी जा सकती है । पिछले सप्ताह अमेरिका-ईरान सीजफायर की खबरों के बाद Sensex में 4,230.7 अंक या 5.77 प्रतिशत और Nifty में 1,337.5 अंक या 5.88 प्रतिशत की तेजी आई थी, जो अब दबाव में आ सकती है । सोहम एसेट मैनेजर्स के संजय पारेख का कहना है कि बाजार पूरी तरह कमजोर नहीं होगा और न्यूट्रल रुख में रह सकता है, क्योंकि निवेशकों को उम्मीद है कि अमेरिका पर समझौते का दबाव बना रहेगा । Geojit Investments के मुख्य निवेशण रणनीतिकार VK विजयकुमार ने बताया कि अप्रैल में FPI बिकवाली जारी है और कुल आउटफ्लो 1,90,046 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जो बाजार की संवेदनशीलता को बढ़ा रहा है ।
भारतीय रुपये पर दबाव बढ़ेगा
तेल की कीमतों में तेजी से भारतीय रुपये पर दबाव बढ़ने की आशंका है और USD/INR 84.20-84.50 की रेंज में जा सकता है । भारत अपनी कुल तेल जरूरत का 85 प्रतिशत आयात करता है, इसलिए कच्चे तेल की कीमतों में हर 10 डॉलर की बढ़ोतरी से देश का तेल आयात बिल लगभग 10-12 अरब डॉलर बढ़ जाता है । यह स्थिति RBI के लिए चुनौती पैदा कर सकती है और मौद्रिक नीति में ढील की संभावनाओं को प्रभावित कर सकती है। ऊर्जा और रक्षा क्षेत्र के शेयर जैसे ONGC, Reliance Industries और Hindustan Aeronautics में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ सकती है, जबकि पेंट, टायर और FMCG कंपनियों के मार्जिन पर दबाव बन सकता है.
Disclaimer: यहां पर दी गई जानकारी कोई भी निवेश सलाह नहीं है। शेयर बाजार में निवेश करने से पहले मार्केट एक्सपर्ट की राय जरुर लें और अपनी जिम्मेदारी पर ही निवेश करें।




